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स्वतंत्रता दिवस (15 August) पर भाषण

15 August पर भाषण

15 अगस्त अर्थात स्वतंत्रता दिवस इस दिन हमारा देश भारत अंग्रेजों की दासता से आजाद हुआ था। तब से यह राष्ट्रीय पर्व हम लगातार मनाते आ रहे हैं। आज के इस ब्लॉग में मैं 15 अगस्त पर भाषण देने वाला हूं।

कई बार इस अवसर पर हमें स्कूल, college, यूनिवर्सिटी, एवं अन्य स्थानों में 15 अगस्त के बारे में बोलने के लिए कहा जाता है। मैं अपने इस ब्लॉग के माध्यम से आपको 15 अगस्त की गरिमा को समझाने का प्रयास करूंगा। 


आदरणीय मुख्य अतिथि, प्रिंसीपल, शिक्षकों, मेरे माता पिता और मेरे प्यारे दोस्तों को मै संतोष शर्मा 15 अगस्त (स्वतंत्रता दिवस) हार्दिक शुभकामनाएं देता हूं। आज बड़े ही सौभाग्य की बात है मुझे भी इस स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर आप सबों के समक्ष दो शब्द बोलने का मौका मिला है। आज का दिन हमारे लिए बहुत ही महत्वपूर्ण दिनों में से एक है। आज बहुत खुशी की बात है कि हमारा देश भारत अपना 74 वा स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। 

15 August पर भाषण हिंदी में
Happy Independence Day

आज का दिन हम अपने वीर स्वतंत्रता सैनिकों को याद करने का दिन है। आज मैं अपने देश के लिए बलिदान देने वाले तमाम देश भक्तों को नमन करता हूं जिन्होंने की अपने देश के लिए प्राणों की बाजी लगा दी उन वीर सपूतों को मेरे और से तहे दिल से प्रणाम करता हूं। 

कहां जाता है कि उन दिनों हमारा देश आज तक स्वतंत्र नहीं था यहां पर अंग्रेजों का राज था। 16 वीं शताब्दी में विदेशियों का आगमन हमारे देश में हो चुका था। 17वीं शताब्दी में यूरोपीय व्यापारियों ने भारतीय उपमहाद्वीप में अपना दबदबा कायम कर चुका था। उन्होंने अपने सैन्य शक्ति की बदौलत अपने आपको यहां स्थापित कर दिया था। और 18वीं सदी के आते-आते ईस्ट इंडिया कंपनी ने भारत के कई स्थानीय राज्यों में अपना कब्जा कर रखा था।

अब धीरे-धीरे अंग्रेजों की पकड़ भारत पर मजबूत होने लगी थी। अब हमारा देश लगातार खराब स्थिति से गुजर रहा था। अब जरूरी था कि भारत भी उन लोगों के खिलाफ अपनी आवाज बुलंद करें ताकि देश को उनकी दासता से मुक्त कराया जाए। भारत के वीर महापुरुषों ने अपने देश को सफलता दिलाने की कसम खाई। 

अब धीरे-धीरे अंग्रेजो के खिलाफ लोग एकजुट होकर उनके खिलाफ आवाज उठाना शुरू कर दिया था। क्योंकि उन लोगों की सहनशक्ति अब खत्म हो चुकी थी उनकी भी इच्छा थी के हम अपने देश में किसी अन्य को क्यों शासन करने देंगे। 
यह हमारी मातृभूमि है और अपने मातृभूमि के खातिर अगर हमें अपने प्राणों की बाजी लगाना पड़े तो पर भी कोई फर्क ना पड़ेगा और हम अंग्रेज जो को यहां से खदेड़ कर ही रहेंगे चाहे हमें इसके लिए किसी भी स्थिति से क्यों न गुजारना पड़ेगा। 


देश की आजादी के लिए कई वीरों ने अपने प्राणों की बाजी लगा दी। ना जाने कितने माताओं की गोद सूनी हो गई। इसके बावजूद अंग्रेजों का अत्याचार दिन प्रतिदिन पता चला गया। इसके बावजूद भी सभी भारतीय ने इसके खिलाफ आवाज उठाना बंद नहीं किया। 

भारत को आजादी दिलाने का प्रथम प्रयास 18 57 ईस्वी में किया गया । लेकिन कुछ कारणों के कारण यह प्रयास और असफल रहा। आज सोचता हूं कि उस समय हमारे पूर्वज देश के लिए यह सब नहीं करते तो शायद आज हमारा जो अस्तित्व है हुआ ही नहीं रहता। हो सकता था कि हम अब तक दूसरों की गुलामी करते। लेकिन हमारे वीर सपूतों में उसके सारे प्रयास को विफल कर दिया। 

भारत को आजादी दिलवाने में कई वीर सपूतों का हाथ रहा है, इनमें से एक महात्मा गांधी, पंडित जवाहरलाल नेहरू, डॉ राजेंद्र प्रसाद, मोतीलाल नेहरू, लाला लाजपत राय, लाल बहादुर शास्त्री, सुभाष चंद्र बोस, चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह, खुदीराम बोस जैसे कई महान देशभक्त रहे हैं जिन्होंने अपने देश के प्राणों के लिए तनिक ना घबरा के अंग्रेजो के खिलाफ बराबर मजबूती से आगे बढ़ता गया। भगत सिंह, सुखदेव, और राजगुरु ने अपने देश के लिए हंसते हंसते फांसी को अपने गले से लगा लिया। 

भारत को आजादी दिलवाने में अनेक वीरों का महत्वपूर्ण योगदान रहा है इन वीरों में से एक हमारे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का नाम आप लोगों ने अवश्य सुना होगा। जिन्होंने की अपने देश के आजादी के लिए सदैव तत्पर रहते थे।  उन्होंने हमारे देश को आजादी दिलवाने के लिए कई महत्वपूर्ण आंदोलन शुरू किया ताकि हमारे देश के सभी नागरिक जागरूक हो सके और अंग्रेज सरकार के विरुद्ध आवाज उठाई उसके द्वारा बनाए गए सामानों का बहिष्कार करें और स्वयं आत्मनिर्भर बनने की कोशिश करें। 

महात्मा गांधी का असहयोग आंदोलन, सवज्ञ अवज्ञा आन्दोलन, एवं भारत छोड़ो आंदोलन इनमें से प्रमुख रहे हैं । 1942 में चलाया गया भारत छोड़ो आंदोलन ने ब्रिटिश शासकों को भारत छोड़ने पर मजबूर कर दिया। अतः अथक प्रयास और कई कुर्बानियों के बाद हमारा यह देश भारत अंततः अंग्रेजों की दासता से 15 अगस्त 1947 को आजाद हो गया। तभी से यह स्वतंत्रता दिवस हम अभी तक मनाते आ रहे हैं। 15 अगस्त ब्रिटिश राज पर आजादी एवं हमारी शक्ति को दर्शाता है साथ ही साथ इस दिन यह हमारी राष्ट्र की एकजुटता को भी परिभाषित करता है।

स्वतंत्रता दिवस के शुभ अवसर पर सभी विद्यालय, कॉलेज, विश्वविद्यालय एवं सरकारी एवं गैर सरकारी संस्थानों इस दिन अवकाश रहते हैं। क्योंकि इस दिन 15 अगस्त यहां मनाया जाता है और जगह पर झंडातोलन का कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस अवसर पर विद्यालयों और कॉलेजों में कई सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन भी किया जाता है। 

इनमें से भाषण, संगीत, नृत्य, स्लोगन‌  जैसे अन्य प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाता है। सभी अपने देश के वीर सपूतों को इस दिन याद किया करते हैं। स्वतंत्रता दिवस एक राष्ट्रीय त्योहार के रूप में प्रति वर्ष 15 अगस्त को मनाया जाता है। 

इस दिन हमारे वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिल्ली के लाल किले पर राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। साथ ही साथ हुआ अपने संपूर्ण राष्ट्र को प्रधानमंत्री द्वारा संबोधित किया जाता है।  इसके बाद हमारे प्रधानमंत्री अपने वीर सपूतों को सलामी देते हैं और उसकी महिमा को याद करते। 

दिल्ली में स्वतंत्रता दिवस की तैयारी महीनों पहले से शुरू हो जाती हैं। इस दिन दिल्ली में इंडिया गेट, राष्ट्रपति भवन और सरकारी इमारतों को रोशनी से सजाया जाता है। इस दिन पैरेड का आयोजन भी किया जाता है। इसमें भारतीय सभी सैन्य शक्ति भाग लेते हैं। साथ ही वह हमारे सैन्य शक्ति के सामर्थ्य को भी दर्शाती है। इस अवसर पर जहां जगहों पर झांकियां निकाली जाती है।

आज हमारा देश भारत दिन प्रतिदिन आगे बढ़ता जा रहा है‌ और हमारा देश लगातार एक विश्व शक्ति के रूप में पूरी दुनिया में उबर ‌ के आई है। आज हमारे देश का स्वयं  का अपना संविधान है। जो हमारी शक्ति को दर्शाता है। आज के दिन हमें अपने सीमाओं पर रहने वाले वीर सपूतों को भी नहीं भूलना चाहिए क्योंकि वह दिन-रात सीमा पर जाकर हमारी देश की रक्षा किया करते हैं। अगर वह जगते हाय तभी हम चैन से अपने घरों में आराम की नींद सो पाते हैं अन्यथा यह संभव नहीं हो सकता है। 

उसे हमेशा अनेक कठिनाइयों से सामना करना पड़ता है, कब कहां से हमला हो जाए कुछ कहा नहीं जा सकता है इसके जवाब देने के लिए सदैव में मुस्तैद और तत्पर रहते हैं। हमें अपने ऐसे वीर जवानों पर गर्व है। 

हमें इन लोगों से प्रेरणा लेनी चाहिए और हमें भी अपने देश की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहना चाहिए। आइए हम सब मिलकर करें कि हम भी अपने राष्ट्र को विकसित और मजबूत बनाने के लिए अपना योगदान देंगे ताकि हमारा राष्ट्र भी लगातार आगे प्रगति की राह पर बढ़ता रहे। 

आज के लिए हम अपना भाषण यहीं पर समाप्त करते हैं। हमारे बातों को ध्यान से सुनने के लिए आप सभी लोगों का धन्यवाद। 
अंत में कहे। अब मैं आपको भी अपना वक्तव्य अब रखने के लिए आमंत्रित करता हूं।
जय हिंद जय भारत
भारत माता की जय

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      By:-  Gyan Adda

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