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Eassy on Janmashtami (जन्माष्टमी पर निबंध हिंदी में)

    जन्माष्टमी पर निबंध

आज के इस ब्लॉग में मैं आप लोगों के साथ फिर से एक नई जानकारी लेकर आया हूं। मेरे ब्लॉग Gyan Adda मैं आप सभी का स्वागत है। आज के इस ब्लॉग में मैं आपको जन्माष्टमी के बारे में बताने वाला हूं। 


जिसके अंतर्गत मैं आपको जन्माष्टमी के संबंधित तमाम जानकारी एक ही पोस्ट में देने का प्रयास करूंगा। हम सब जानते हैं कि जन्माष्टमी का त्योहार क्यों मनाया जाता है । हिंदू धर्म की मान्यता के अनुसार इस दिन भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है।


परिचय :-

 जन्माष्टमी का अर्थ है जन्म +अष्टमी भाद्रपद कृष्ण पक्ष को भगवान श्री कृष्ण का जन्म अष्टमी की रात्रि को हुआ था।जन्माष्टमी भारत के प्रमुख त्योहारों में से एक है। श्री कृष्ण भगवान के जन्मदिन के उपलक्ष्य में लोग इसे जन्माष्टमी के रूप में मनाते हैं। इसी दिन कृष्ण कन्हैया भगवान श्री कृष्ण जी का जन्म हुआ था। यह त्योहार भारत में बड़े धूमधाम के साथ मनाया जाता है। 


इसके अतिरिक्त या त्यौहार नेपाल, बांग्लादेश, पाकिस्तान, अमेरिका एस्कॉन मंदिर के माध्यम से विभिन्न तरह से मनाया जाता है। इसके साथ ही साथ जहां पर भी भारतवासी दुनिया के कोने में रहते हैं वहां पर हुआ इस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा करते हैं। यह त्योहार पूरे आस्था और विश्वास के साथ पूरी दुनिया में मनाया जाता है। 

जन्माष्टमी पर निबंध
Janmashtami


कब और क्यों मनाया जाता है?

भगवान श्री कृष्ण के जन्मदिन को हम सभी बड़ी धूमधाम के साथ मनाते हैं। यह त्योहार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन मनाया जाता है। 
कंस मथुरा का राजा था। जो अत्यंत दुराचारी और प्रतिक्रियावादी था। वह लगातार ऋषि-मुनियों और अन्य लोगों पर अत्याचार करता रहता था। एक दिन की बात है आकाश से भविष्यवाणी हुई की उसके बहन देवकी के आठवें पुत्र द्वारा उसकी मृत्यु होगी।

 यह सुनकर कंस ‌ काफी भयभीत हो गया और अपनी बहन देवकी और बहनोई वासुदेव को कारागार में बंद कर दिया। वह देवकी को जब भी पुत्र की प्राप्ति होती है तो कंस जाकर उसको मार देता था। वह सोचता था कि इसी तरह देवकी के आठवें पुत्र को मार देगा ताकि उसकी मृत्यु टल जाए। इस तरह से लगातार हुआ देवकी के सात पुत्रों को मारता गया।

 आठवें पुत्र की बारी आई देवकी के पुत्र से इस बार कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को आधी रात को एवं मूसलाधार बारिश में भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ। जब भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ तो सारे पहरेदार सो गए एवं देवकी और वासुदेव के हाथों की जंजीरे स्वत: अपने आप खुल गई। इस बार वासुदेव में श्री कृष्ण भगवान जी को नंद बाबा और यशोदा मैया के यहां उसी रात दे आते। भगवान श्री कृष्ण का पालन पोषण यशोदा मैया और नंद बाबा ने की। वहां जाकर भगवान ने कई बाल लीलाएं भी थी।भगवान श्रीकृष्ण ने आगे चलकर अपने मामा कंस का वध किया और मथुरा वासी को एवं समस्त संसार को भय मुक्त कर दिया। 

तैयारी:- 

इस की तैयारी कई दिन पहले से की जाती है। अनेक जगहों पर भगवान श्री कृष्ण की प्रतिमा बनाई जाती है। लोग उसकी पूजा के लिए पहले से तैयारी में लग जाते हैं। ताकि कृष्ण कन्हैया के जन्मदिन को धूमधाम से मनाएं। लोग इसकी तैयारी के लिए बाजार में खरीदारी करते हैं एवं पूजा में उपयुक्त अनेक समान लाते हैं। साथ ही साथ सजावट के अनेक रंग बिरंगे एवं आकर्षक चीजें खरीदते हैं ताकि भगवान जी को अच्छे ढंग से सजाया जाए।

मथुरा में जन्माष्टमी:- 

मथुरा में जन्माष्टमी के दिन कई जगहों से लोग इस स्थान पर इस त्यौहार को देखने के लिए आते हैं। श्री कृष्ण का जन्म स्थान होने के साथ ही साथ हुआ है यहां के द्वारकाधीश भी रह चुके हैं। कुछ दिन पूरे मथुरा को सजाया जाता है । पूरे मथुरा वासी जन्माष्टमी के त्यौहार को बड़े ही धूमधाम के साथ मनाते हैं। और अपने लल्ला श्री कृष्ण भगवान की पूजा अर्चना करते हैं।

जन्माष्टमी पूजा में उपयुक्त सामग्री:-


इस पूजा में अनेक प्रकार की सामग्रियों की आवश्यकता पड़ती है। जिसमें की फल, दूध, मक्खन, धनिया मेवे , पंचामृत, अक्षत, चंदन, गंगाजल, तुलसी दल, चंदन, मिश्री, तथा फूलों का आवश्यकता मूल रूप से पड़ती है। 

उपवास :- इस दिन बहुत सारे कृष्ण भक्त उपवास रखते हैं ताकि वह श्री कृष्ण भगवान की पूजा कर सके। और रात्रि को भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना के बाद ही अन्य जल ग्रहण करते हैं। 

मटकी फोड़ प्रतियोगिता:-

जन्माष्टमी के शुभ दिन पर जगह जगह पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाता है। इसमें बाल -गोपाल भाग लेते हैं। लोगों द्वारा मटकी में माखन रख कर उसे एक उचित ऊंचाई पर आसमान में टांग दिया जाता है। फिर एक दूसरे की मदद से आसमान में लटके हुए मटकी तक पहुंचा जाता है और फिर इसे फोड दिया जाता है। इस प्रतियोगिता को देखने में बहुत सुंदर लगता है। लेकिन यह कभी-कभी खतरनाक भी हो सकते हैं इसीलिए हमें पहले से सावधानी बरतनी चाहिए ताकि किसी प्रकार के दुर्घटना का हम शिकार ना हो जाए।


मेले और सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन
श्री कृष्ण के जन्मदिन के अगले दिन कई जगहों पर मेला का आयोजन किया जाता है। भक्तों द्वारा भगवान श्री कृष्ण के दर्शन की जाती है और मेले का आनंद उठाते हैं। साथ ही साथ कई चीजें भी खरीदते हैं। इस दिन कई जगहों पर सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाता है। 

निष्कर्ष:- 

हमें जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाना चाहिए। हमें उस दिन भगवान श्री कृष्ण की पूजा अर्चना करनी चाहिए। यह जरूरी नहीं है कि हम उपवास ही करें। कहीं या ना हो जाए कि हम उपवास के हैं और इसका असर हमारे स्वास्थ्य पर गया ‌। हमें चाहिए कि इसकी पूजा श्रद्धा भाव एवं आस्था के साथ हो। इसीलिए जरूरी है कि हम सिर्फ श्रद्धा एवं भाव से मनाएं।


हमारा देश भारत पर निबंध हिंदी में

भगवान श्री कृष्ण की लीलाएं:- 

भगवान श्री कृष्ण बचपन से ही बड़े ही नटखट बालक है। वह और उसके मित्र गोकुल में कई लीलाएं कर चुके हैं। वह लोगों के माखन खा जाया करते थे। भगवान श्री कृष्ण का परम मित्र सुदामा रहे हैं।

 वह सुदामा एवं अन्य मित्र के साथ-साथ खेलते थे। श्री कृष्ण की शिक्षा दीक्षा गुरु संदीपन के यहां हुई यहीं पर भगवान श्री कृष्ण ने अपनी शिक्षा प्राप्त की। श्री कृष्ण ने बचपन से ही अपने लीलाएं प्रारंभ कर दी उन्होंने पूतना, बधासूर, अधासूर जैसे राक्षसों का वध कर दिया। साथ ही साथ उन्होंने अत्याचारी राजा और अपने मामा कंस का वध किया और सभी को उसके बंधन से मुक्त कराया।

महाभारत में श्री कृष्ण

श्री कृष्ण द्वापर युग के एक परम ज्ञानी, युगपुरुष, अत्यंत शक्तिशाली, प्रभावशाली, तथा एक कुशल राजनीतिज्ञ ‌थे। वह द्वारकाधीश बनने के साथ ही साथ महाभारत जैसे धर्म युद्ध में पांडवों का साथ दिया। उन्होंने धनुर्धारी अर्जुन को गीता का उपदेश दिया। उन्होंने महाभारत में पांडवों का मार्गदर्शन किया और कौरवों के खिलाफ विजय दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

 गीता में भगवान श्रीकृष्ण ने कहा है कि जब जब धरती पर अत्याचार अत्यंत बढ़ जाएगा तब तक उसका संहार करने के लिए भगवान स्वयं अवतरित होंगे और पूरी दुनिया को भय मुक्त करेंगे।महाभारत में उन्होंने कभी अस्त्र नहीं उठाया। बल्कि उन्होंने महाभारत में अर्जुन के सारथी बनके उसका मार्गदर्शन एवं सहयोग किया। इस युद्ध में धर्म की जीत हुई ।

गीता का उपदेश:-

 महाभारत युद्ध में जब अर्जुन के सामने उसके गुरु एवं भाई के खिलाफ उसे युद्ध करना था। अर्जुन सोचने लगा वह कैसे अपने भाई और गुरु के खिलाफ युद्ध कर सकता है। उसका मन अशांत हो गया था। तभी भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें उपदेश दिया उसे ही गीता का उपदेश कहा जाता है। आज हम आपको श्री कृष्ण भगवान के द्वारा बताए गए कुछ कथनों को आपके सामने प्रस्तुत करने वाला हूं जिसका व्यवहार कर आप अपने जीवन में परिवर्तन ला सकते हैं और अपने जीवन को सफल भी बना सकते हैं।

कृष्ण द्वारा गीता में कहे गए कुछ कथन


1. जीवन का आकलन करना

श्री कृष्ण ने कहा कि कोई भी काम करने से पहले हमें एक बात अवश्य सोच लेना चाहिए। हमें हमेशा अनुशासित रहना चाहिए। ताकि  हम आगे किसी प्रकार की परेशानियों का सामना ना करना पड़े। 

2. क्रोध में कोई फैसला ना लें

 श्री कृष्ण ने कहा कि हमें कभी भी क्रोध में कोई फैसला नहीं लेना चाहिए। क्योंकि अगर हो सकता है कि क्रोध में लिया हुआ फैसला कभी गलत साबित हो इससे हमारी ही हानि होती है। कुछ भी करने से पहले हमें अच्छी तरह से सोच विचार कर लेने में ही भलाई है।

3. कोई काम शुरू करने से पहले अभ्यास करना

 उन्होंने कहा है कि कोई भी काम करने से पहले अभ्यास करना अत्यंत जरूरी है। क्योंकि अभ्यास करके ही मन को अपने वश में किया जा सकता है।

4. खुद पर विश्वास रखना

भगवान श्री कृष्ण ने कहा कि कोई भी काम करने से पहले हमें खुद पर विश्वास रखना अत्यंत आवश्यक है। अगर हमें खुद पर विश्वास नहीं है तो हम कोई भी काम ठीक से नहीं कर सकते क्योंकि जो व्यक्ति जैसी सोच रखता है वैसी ही वह बन पाता है इसीलिए हमें हमेशा अपने ऊपर पूरा विश्वास रखना चाहिए।
5. कर्म पर ध्यान देना

 भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि हमें हमेशा अपने कर्म पर ध्यान देना चाहिए हमें अपने भविष्य की चिंता नहीं करनी। अगर आज हम मेहनत और लगन से अपना काम करेंगे तो अवश्य हमारा भविष्य उज्जवल होगा। इसीलिए हमें अपने काम पर ध्यान देना चाहिए।

6. कभी भी ज्यादा उत्साहित और जलन ना करना।

 भगवान श्री कृष्ण ने कहां हमें भी सफलता मिलने के बाद ज्यादा उत्साहित नहीं होना चाहिए। हमारी खुशियां होनी चाहिए कि हम और आगे बढ़े। हमें कभी भी किसी से जलन की भावना नहीं रखनी चाहिए इससे हमारा ही नुकसान होता है।

7. अपने हुनर को पहचाना।

भगवान श्री कृष्ण ने कहा है कि प्रत्येक व्यक्ति के अंदर कोई न कोई हुनर अवश्य छुपा रहता है। जरूरत है हमें उस हुनर को पहचानने की । अगर हम उस हुनर को पहचान जाएंगे तो अवश्य ही अपने जीवन में सफल हो पाएंगे।

आपको भी भगवान श्री कृष्ण से संबंधित कोई अन्य जानकारी है तो आप हमारे साथ शेयर कर सकते हैं। साथ ही आप यह बताइए कि भारत में आपका मनपसंद त्योहार कौन सा है? 
यहां बात आप अपने कमेंट द्वारा हमें बताएं।

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आज के लिए इतना ही मिलते हैं अगले पोस्ट के साथ।
 धन्यवाद

By:- Gyan Adda

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